नौकर और गुलाम

जब आप किसी पद या औहदे पे किसी ऐसे व्यक्ति को देखे जिसे देख कर ही लगता हो की यह इस पद के लायक नहीं है तो यह समझ लीजिये की यह अपनी सोच और अपने काम करने और अपने फैसले खुद लेने के लायक नहीं है इसलिए की यह नियुक्ति इस लिए नहीं की गई की यह व्यक्ति अपने दिमाग अपनी सोच समझ से काम करे बल्कि नियुक्त करने वाले को एक गुलाम चाहिए था जो की बस वैसा ही करे जैसा नियुक्त करने वाला कहे ,इसलिए अयोग्य व्यक्ति ओहदे पर बैठा एक गुलाम मात्र है। 
नौकर तन्खुआ के बदले अपनी सेवाएं देता है वोह अपनी जिम्मेदारिओं को अपनी सोच समझ सही और गलत का फरक करते हुए निभाता है। उसमे गलत बात पर अपने मालिक तक से जिरह करने का दम होता है यह आसानी से अपना ज़मीर नहीं बेचते और गलत जो लगे उस पर आसानी से राज़ी नहीं होते इसलिए कई बार कुछ लोगो को गुलामो की ज़रुरत होती है ताकि गुलाम कोई सवाल पूछे बिना वैसा ही करे जैसा मालिक कहे। 
नौकर रखे जा सकते है ,तन्खवाह दो और किसी को नौकरी पर रख लो। लेकिन गुलाम कभी रखे नहीं जा सकते गुलाम बनाने पड़ते है। 
गुलाम बनाने के 2 तरीके होते है। एक तो यह की कोई अपनी ताक़त के बल पर किसी को अपनी गुलामी करने पर मजबूर कर ले, लेकिन ऐसे गुलाम खतरनाक होते है इसलिए की इनके अंदर विद्रोह भडकता रहता है और वक़्त आने पर बाज़ी पलट जाती है। लेकिन गुलाम बनाने का दूसरा तरीका बहुत मज़बूत और टिकाऊ है। किसी भी व्यक्ति को ऐसी चीज़ देदो जिसके वोह लायक नहीं हो या कोई ऐसा पद ऐसा ओहदा देदो जिसके वोह लायक न हो तो आप एक टिकाऊ गुलाम बनाने मे सफल हो गए , और उसे खुद यह पता हो की मे इस लायक नहीं हूँ फिर भी मुझे यह चीज़ यह पद यह ओहदा दिया जा रहा है तो ऐसे व्यक्ति अपनी गुलामी बहुत मन और दिल लगा कर करते है और बड़े ही ईंमानदार गुलाम साबित होते है। 
अपने आस पास के सिस्टम पर नज़र डालेगें तो बहुत सरे नज़र आ जायेगें। 

No comments:

Post a Comment